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mahabharat 6.48.67-68h: महाराज! तब शान्तनुपुत्र भीष्म ने दूसरा धनुष लेकर रणभूमि में कंकपात्रों से युक्त तीक्ष्ण बाणों द्वारा श्वेत को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  6.48.67-68h 
ततोऽन्यद् धनुरादाय भीष्म: शान्तनवो युधि॥ ६७॥
श्वेतं विव्याध राजेन्द्र कङ्कपत्रै: शितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब शान्तनुपुत्र भीष्म ने दूसरा धनुष लेकर रणभूमि में कंकपात्रों से युक्त तीक्ष्ण बाणों द्वारा श्वेत को घायल कर दिया।
 
King! Then Shantanu's son Bhishma took another bow and wounded Shweta on the battlefield with sharp arrows having Kankapatra. 67 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)