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mahabharat 6.48.6-7: उस युद्ध में, शांतनुपुत्र भीष्म ने अनेक रथों के आसनों को सारथिओं से खाली कर दिया। वहाँ उन्होंने एक अद्भुत कार्य किया। उन्होंने अपने बाणों से अनेक श्रेष्ठ सारथिओं को पीड़ा पहुँचाई। वे सूर्य के समान तेजस्वी थे। उन्होंने अपने बाणों से सूर्यदेव को भी ढक लिया। 6-7।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  6.48.6-7 
तत्राकरोद् रथोपस्थान् शून्यान् शान्तनवो बहून्॥ ६॥
तत्राद्भुतं महच्चक्रे शरैरार्च्छद् रथोत्तमान्।
समावृणोच्छरैरर्कमर्कतुल्यप्रतापवान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस युद्ध में, शांतनुपुत्र भीष्म ने अनेक रथों के आसनों को सारथिओं से खाली कर दिया। वहाँ उन्होंने एक अद्भुत कार्य किया। उन्होंने अपने बाणों से अनेक श्रेष्ठ सारथिओं को पीड़ा पहुँचाई। वे सूर्य के समान तेजस्वी थे। उन्होंने अपने बाणों से सूर्यदेव को भी ढक लिया। 6-7।
 
In that war, Shantanu's son Bhishma made the seats of many chariots empty of charioteers. There he performed a most wonderful deed. He inflicted great pain on many excellent charioteers with his arrows. He was as radiant as the Sun. He even covered the Sun God with his arrows. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)