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mahabharat 6.48.54-55h: तब शांतनुपुत्र भीष्म ने भी दस बाण चलाकर बदला लिया। उनसे घायल होने पर भी शक्तिशाली श्वेत विचलित नहीं हुआ। वह पर्वत के समान स्थिर खड़ा रहा।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  6.48.54-55h 
तं प्रत्यविध्यद् दशभिर्भीष्म: शान्तनवस्तदा॥ ५४॥
स विद्धस्तेन बलवान् नाकम्पत यथाचल:।
 
 
अनुवाद
तब शांतनुपुत्र भीष्म ने भी दस बाण चलाकर बदला लिया। उनसे घायल होने पर भी शक्तिशाली श्वेत विचलित नहीं हुआ। वह पर्वत के समान स्थिर खड़ा रहा।
 
Then Shantanu's son Bhishma also took revenge by shooting ten arrows. Even after being injured by them, the powerful Shweta was not perturbed. He stood as still as a mountain. 54 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)