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mahabharat 6.48.52-53h: श्वेत ने अपना धनुष खींचा और भीष्म को सात बाणों से घायल कर दिया। तब वीर भीष्म ने श्वेत के पराक्रम को बड़े बल से रोक दिया, जैसे एक पागल हाथी दूसरे पागल हाथी को रोक लेता है।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  6.48.52-53h 
निगृह्य कार्मुकं श्वेतो भीष्मं विव्याध सप्तभि:।
पराक्रमं ततस्तस्य पराक्रम्य पराक्रमी॥ ५२॥
तरसा वारयामास मत्तो मत्तमिव द्विपम्।
 
 
अनुवाद
श्वेत ने अपना धनुष खींचा और भीष्म को सात बाणों से घायल कर दिया। तब वीर भीष्म ने श्वेत के पराक्रम को बड़े बल से रोक दिया, जैसे एक पागल हाथी दूसरे पागल हाथी को रोक लेता है।
 
Shweta drew his bow and pierced Bhishma with seven arrows. Then the valiant Bhishma stopped Shweta's feat with great force, just as a mad elephant stops another mad elephant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)