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mahabharat 6.48.37-38: परन्तु जब भीष्म ने श्वेत को कौरव सेना का पूर्वोक्त प्रकार से संहार करते देखा, तब वे अकेले ही उत्तेजित और हर्षित हो गये और पाण्डवों को शोक में डालकर, भय और जीवन की आसक्ति को त्यागकर, स्वयं उस महायुद्ध में दुर्योधन के प्रिय कार्य में लग गये।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  6.48.37-38 
तमेवमुपलक्ष्यैको हृष्ट: पुष्ट: परंतप॥ ३७॥
दुर्योधनप्रिये युक्त: पाण्डवान् परिशोचयन्।
जीवितं दुस्त्यजं त्यक्त्वा भयं च सुमहाहवे॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जब भीष्म ने श्वेत को कौरव सेना का पूर्वोक्त प्रकार से संहार करते देखा, तब वे अकेले ही उत्तेजित और हर्षित हो गये और पाण्डवों को शोक में डालकर, भय और जीवन की आसक्ति को त्यागकर, स्वयं उस महायुद्ध में दुर्योधन के प्रिय कार्य में लग गये।
 
But when Bhishma saw Sweta killing the Kaurava army in the aforesaid manner, he alone became excited and elated and putting the Pandavas in grief, leaving behind the fear and attachment to life, he himself got busy in Duryodhan's favourite task in that great war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)