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mahabharat 6.48.33-34h: उस महासमर में हम लोगों के भयभीत होने का समय आ गया था, फिर भी केवल पुरुषोत्तम भीष्म ही मेरे पर्वत के समान विनीत भाव से वहाँ खड़े रहे ॥33 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.48.33-34h 
अदीनो दीनसमये भीष्मोऽस्माकं महाहवे॥ ३३॥
एकस्तस्थौ नरव्याघ्रो गिरिर्मेरुरिवाचल:।
 
 
अनुवाद
उस महासमर में हम लोगों के भयभीत होने का समय आ गया था, फिर भी केवल पुरुषोत्तम भीष्म ही मेरे पर्वत के समान विनीत भाव से वहाँ खड़े रहे ॥33 1/2॥
 
In that great battle, the time had come for us to be afraid, yet only Bhishma, the best of men, stood there without any humility, like the mountain of mine. 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)