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mahabharat 6.48.30-31h: राजन! उसके बाणों से बहुमूल्य छत्र और ध्वजाएँ भी चकनाचूर हो गईं। हे भरतपुत्र! श्वेत ने न केवल घोड़ों, रथों और मनुष्यों के समूह को मार डाला, अपितु सैकड़ों हाथियों को भी मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  6.48.30-31h 
छत्राणि च महार्हाणि पताकाश्च विशाम्पते।
हयौघाश्च रथौघाश्च नरौघाश्चैव भारत॥ ३०॥
वारणा: शतशश्चैव हता: श्वेतेन भारत।
 
 
अनुवाद
राजन! उसके बाणों से बहुमूल्य छत्र और ध्वजाएँ भी चकनाचूर हो गईं। हे भरतपुत्र! श्वेत ने न केवल घोड़ों, रथों और मनुष्यों के समूह को मार डाला, अपितु सैकड़ों हाथियों को भी मार डाला।
 
King! Even the precious umbrellas and flags were shattered by his arrows. O son of Bharata! Shwet not only killed horses, chariots and a crowd of humans but also killed hundreds of elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)