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mahabharat 6.48.26-27h: कुछ हाथी मारे गए, कुछ के सिर कट गए, कुछ के प्राण छिद गए और कुछ के घोड़े मारे गए। जब ​​भीष्म अपने शत्रुओं का संहार कर रहे थे, तब ऐसा कोई भी शत्रु नहीं बचा था जो घायल न हुआ हो॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.48.26-27h 
गजो हत: शिरश्छिन्नं मर्म भिन्नं हयो हत:॥ २६॥
अहत: कोऽपि नैवासीद् भीष्मे निघ्नति शात्रवान्।
 
 
अनुवाद
कुछ हाथी मारे गए, कुछ के सिर कट गए, कुछ के प्राण छिद गए और कुछ के घोड़े मारे गए। जब ​​भीष्म अपने शत्रुओं का संहार कर रहे थे, तब ऐसा कोई भी शत्रु नहीं बचा था जो घायल न हुआ हो॥26 1/2॥
 
Some elephants were killed, some had their heads cut off, some had their vital parts pierced and some lost their horses. When Bhishma was killing his enemies, there was not a single opponent left who was not wounded.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)