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mahabharat 6.48.23-24h: वह युद्ध अत्यंत भयानक, रोमांचकारी और सबको बेचैन कर देने वाला था। उसमें कोई भी पिता अपने पुत्र को पहचान तक नहीं पा रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.48.23-24h 
तस्मिन्नत्याकुले युद्धे दारुणे लोमहर्षणे॥ २३॥
पिता पुत्रं च समरे नाभिजानाति कश्चन।
 
 
अनुवाद
वह युद्ध अत्यंत भयानक, रोमांचकारी और सबको बेचैन कर देने वाला था। उसमें कोई भी पिता अपने पुत्र को पहचान तक नहीं पा रहा था।
 
That war was extremely dreadful, thrilling and made everyone restless. In it, no father could even recognize his son. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)