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mahabharat 6.48.17-18h: कई वीर पुरुष दूसरों के बाणों से घायल होकर अपने रथों से गिर पड़ते थे। कभी-कभी तो सारथी के मारे जाने पर रथ किसी साधारण लकड़ी के टुकड़े की तरह ऊँचाई से नीचे गिर पड़ता था। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  6.48.17-18h 
स्यन्दनादपतत् कश्चिन्निहतोऽन्येन सायकै:॥ १७॥
हतसारथिरप्युच्चै: पपात काष्ठवद् रथ:।
 
 
अनुवाद
कई वीर पुरुष दूसरों के बाणों से घायल होकर अपने रथों से गिर पड़ते थे। कभी-कभी तो सारथी के मारे जाने पर रथ किसी साधारण लकड़ी के टुकड़े की तरह ऊँचाई से नीचे गिर पड़ता था। 17 1/2
 
Many brave men fell from their chariots after being hit by the arrows of others. Sometimes, when the charioteer was killed, the chariot fell down from a height like an ordinary piece of wood. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)