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mahabharat 6.48.13-14: बहुत से सैनिक एक दूसरे पर आक्रमण करते हुए गिर पड़ते और फिर उठ खड़े होते। फिर उठकर वे दौड़कर एक दूसरे से द्वन्द्वयुद्ध करते। फिर एक दूसरे के प्रहारों से पीड़ित होकर युद्ध के कगार पर गिरकर लोटपोट हो जाते।॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  6.48.13-14 
परस्परेण धावन्त: पतिता: पुनरुत्थिता:॥ १३॥
उत्थाय च प्रधावन्तो द्वन्द्वयुद्धमवाप्नुवन्।
पीडिता: पुनरन्योन्यं लुठन्तो रणमूर्धनि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
बहुत से सैनिक एक दूसरे पर आक्रमण करते हुए गिर पड़ते और फिर उठ खड़े होते। फिर उठकर वे दौड़कर एक दूसरे से द्वन्द्वयुद्ध करते। फिर एक दूसरे के प्रहारों से पीड़ित होकर युद्ध के कगार पर गिरकर लोटपोट हो जाते।॥13-14॥
 
Many soldiers attacking each other would fall down and then get up again. After standing up they would run and engage in a duel with each other. Then, suffering from each other's blows, they would fall and roll on the brink of battle.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)