Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.48.121: उस समय आपके और शत्रुओं के सैनिक बार-बार गर्जना कर रहे थे। उस द्वारथ युद्ध में हुए भयंकर संहार से चिन्तित होकर महाबली पाण्डव योद्धा दुःखी मन से शिविर में लौट आये। 121. | mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तावकानां परेषां च नर्दतां च मुहुर्मुहु:।
पार्था विमनसो भूत्वा न्यवर्तन्त महारथा:।
चिन्तयन्तो वधं घोरं द्वैरथेन परंतपा:॥ १२१॥
अनुवाद
उस समय आपके और शत्रुओं के सैनिक बार-बार गर्जना कर रहे थे। उस द्वारथ युद्ध में हुए भयंकर संहार से चिन्तित होकर महाबली पाण्डव योद्धा दुःखी मन से शिविर में लौट आये। 121.
At that time, your soldiers and those of the enemy were roaring repeatedly. Worried about the terrible carnage that had taken place in that Dvaratha war, the mighty Pandava warriors returned to the camp with a sad heart. 121.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि श्वेतवधे अष्टचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें श्वेतवधविषयक अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥