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mahabharat 6.48.113-114h: उस समय देवताओं, गन्धर्वों, भूतों, नागों और राक्षसों ने भी देखा कि वह बाण महान वज्र के समान प्रज्वलित हुआ और अत्यन्त बलवान श्वेत के कवच और हृदय को छेदकर भूमि में अन्तर्धान हो गया ॥113 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 113-114h
 
 
श्लोक  6.48.113-114h 
ददृशुर्देवगन्धर्वा: पिशाचोरगराक्षसा:।
स तस्य कवचं भित्त्वा हृदयं चामितौजस:॥ ११३॥
जगाम धरणीं बाणो महाशनिरिव ज्वलन्।
 
 
अनुवाद
उस समय देवताओं, गन्धर्वों, भूतों, नागों और राक्षसों ने भी देखा कि वह बाण महान वज्र के समान प्रज्वलित हुआ और अत्यन्त बलवान श्वेत के कवच और हृदय को छेदकर भूमि में अन्तर्धान हो गया ॥113 1/2॥
 
At that time the Gods, Gandharvas, ghosts, serpents and demons also saw that the arrow blazed like a great thunderbolt and after piercing the armour and heart of the immensely powerful Shwet, it disappeared into the ground. ॥ 113 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)