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mahabharat 6.48.111-112: तत्पश्चात् महाबली भीष्म ने अपना धनुष खींचा और उस पर मृत्यु के समान भयंकर, भारी से भारी लक्ष्य को भी भेदने में समर्थ, उत्तम तथा असह्य, पंखयुक्त बाण चढ़ाया; फिर उन्होंने ब्रह्मास्त्र का आवाहन किया और उसे छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 111-112
 
 
श्लोक  6.48.111-112 
तत: शरं मृत्युसमं भारसाधनमुत्तमम्॥ १११॥
विकृष्य बलवान् भीष्म: समाधत्त दुरासदम्।
ब्रह्मास्त्रेण सुसंयुक्तं तं शरं लोमवाहिनम्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली भीष्म ने अपना धनुष खींचा और उस पर मृत्यु के समान भयंकर, भारी से भारी लक्ष्य को भी भेदने में समर्थ, उत्तम तथा असह्य, पंखयुक्त बाण चढ़ाया; फिर उन्होंने ब्रह्मास्त्र का आवाहन किया और उसे छोड़ दिया।
 
Thereafter the mighty Bhishma drew his bow and placed on it a feathered arrow, as dreadful as death, capable of piercing even the heaviest of targets, excellent and unbearable; then he invoked the Brahmastra and released it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)