श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 104-105
 
 
श्लोक  6.48.104-105 
तत: प्रचरमाणस्तु पिता देवव्रतस्तव॥ १०४॥
अन्यत् कार्मुकमादाय त्वरमाणो महारथ:।
क्षणेन सज्यमकरोच्छक्रचापसमप्रभम्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तुम्हारे पिता महारथी देवव्रत ने तुरन्त दूसरा धनुष लिया और वहाँ घूमते हुए क्षण भर में उस पर प्रत्यंचा चढ़ा दी। वह धनुष इन्द्रधनुष के समान चमक रहा था।
 
Thereafter your father, the great warrior Devavrata, immediately took another bow and while roaming around there strung it in a moment. It was shining like a rainbow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)