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mahabharat 6.48.103-104h: कटे हुए धनुष को फेंककर भीष्म पितामह ने देवदूत की बात ध्यान में रखकर तुरन्त श्वेत को मार डालने का निश्चय किया ॥103 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 103-104h
 
 
श्लोक  6.48.103-104h 
तदपास्य धनुश्छिन्नं त्वरमाण: पितामह:॥ १०३॥
देवदूतवच: श्रुत्वा वधे तस्य मनो दधे।
 
 
अनुवाद
कटे हुए धनुष को फेंककर भीष्म पितामह ने देवदूत की बात ध्यान में रखकर तुरन्त श्वेत को मार डालने का निश्चय किया ॥103 1/2॥
 
Throwing away the cut bow, Bhishma Pitamah paid heed to the angel's words and immediately decided to kill Shweta. ॥103 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)