श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 101-102h
 
 
श्लोक  6.48.101-102h 
एतानापतत: सर्वान् द्रोणशल्यकृपै: सह॥ १०१॥
अवारयदमेयात्मा वारिवेगानिवाचल:।
 
 
अनुवाद
उन्हें आते देख अपार पराक्रम से संपन्न भीष्म ने द्रोणाचार्य, शल्य और कृपाचार्य के साथ जाकर उन्हें इस प्रकार रोक दिया, मानो किसी पर्वत ने जल के प्रवाह को रोक दिया हो ॥101 1/2॥
 
Seeing them coming, Bhishma, endowed with immense power, went along with Dronacharya, Shalya and Kripacharya and stopped them as if a mountain had obstructed the flow of water. ॥101 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)