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mahabharat 6.48.10: उन बाणों ने काँटों से युक्त कवचों से विभूषित हाथियों को भी वज्र से घायल हुए पर्वतों के समान गिरा दिया। हे प्रजानाथ! उस समय रथ एक-दूसरे के समीप खड़े हुए दिखाई दिए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.48.10 
गजान् कण्टकसन्नाहान् वज्रेणेव शिलोच्चयान्।
रथा रथेषु संसक्ता व्यदृश्यन्त विशाम्पते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उन बाणों ने काँटों से युक्त कवचों से विभूषित हाथियों को भी वज्र से घायल हुए पर्वतों के समान गिरा दिया। हे प्रजानाथ! उस समय रथ एक-दूसरे के समीप खड़े हुए दिखाई दिए॥10॥
 
Those arrows also knocked down elephants adorned with thorny armours like mountains struck by thunderbolts. O Prajanath! At that time chariots were seen standing next to each other.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)