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श्लोक 6.47.7-8  |
अभिमन्यु: सुसंक्रुद्ध: पिशङ्गैस्तुरगोत्तमै:।
संयुक्तं रथमास्थाय प्रायाद् भीष्मरथं प्रति॥ ७॥
जाम्बूनदविचित्रेण कर्णिकारेण केतुना।
अभ्यवर्तत भीष्मं च तांश्चैव रथसत्तमान्॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| यह देखकर अभिमन्यु अत्यन्त क्रोधित हो गया और पिंगलवर्ण के श्रेष्ठ घोड़ों से जुते हुए रथ पर बैठकर भीष्म के रथ की ओर दौड़ा। उसका वह रथ कर्णिकार चिन्ह से युक्त सोने की बनी एक विचित्र ध्वजा से सुशोभित था। उसने भीष्म और उनकी रक्षा के लिए आये हुए महारथियों पर भी आक्रमण किया। 7-8॥ |
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| Seeing this, Abhimanyu became very angry and sat on a chariot harnessed to the best horses of Pingalavarna and ran towards Bhishma's chariot. That chariot of his was decorated with a strange flag made of gold with the symbol of Karnikara. He also attacked Bhishma and those great charioteers who had come to protect him. 7-8॥ |
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