Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.47.66-67: पाण्डवों की ओर से सुभद्राकुमार अभिमन्यु, भीमसेन, महारथी सात्यकि, केकयराजकुमार, राजा विराट तथा द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न- ये पुरुषसिंह तथा चेदि तथा मत्स्य देश के क्षत्रिय युद्ध कर रहे थे। कुरुकुल के वृद्ध पितामह भीष्म ने उन सभी पर बाणों की वर्षा प्रारम्भ कर दी। 66-67॥ | mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौभद्रे भीमसेने च सात्यकौ च महारथे॥ ६६॥
कैकेये च विराटे च धृष्टद्युम्ने च पार्षते।
एतेषु नरसिंहेषु चेदिमत्स्येषु चैव ह।
ववर्ष शरवर्षाणि कुरुवृद्ध: पितामह:॥ ६७॥
अनुवाद
पाण्डवों की ओर से सुभद्राकुमार अभिमन्यु, भीमसेन, महारथी सात्यकि, केकयराजकुमार, राजा विराट तथा द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न- ये पुरुषसिंह तथा चेदि तथा मत्स्य देश के क्षत्रिय युद्ध कर रहे थे। कुरुकुल के वृद्ध पितामह भीष्म ने उन सभी पर बाणों की वर्षा प्रारम्भ कर दी। 66-67॥
On the side of Pandavas, Subhadrakumar Abhimanyu, Bhimsen, Maharathi Satyaki, Kekayarajkumar, King Virat and Drupada's son Dhrishtadyumna - these Purushasingha and Kshatriyas of Chedi and Matsya country were fighting. Grandfather Bhishma, the old man of Kurukula, started raining arrows on all of them. 66-67॥
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि श्वेतयुद्धे सप्तचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें श्वेतयुद्धविषयक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥