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mahabharat 6.47.57-58h: परन्तु श्वेत तो श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्रों का विशेषज्ञ था। उसने उन पर सात बाण चलाकर उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर दिया, इससे पहले कि वे उसके पास पहुँच पाते। हे भरतश्रेष्ठ! तब श्वेत ने एक बाण लिया जो सबके शरीर को भेदता हुआ रुक्मरथ की ओर चलाया। 57 1/2   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.47.57-58h 
अप्राप्ता: सप्तभिर्भल्लैश्चिच्छेद परमास्त्रवित्।
तत: समादाय शरं सर्वकायविदारणम्॥ ५७॥
प्राहिणोद् भरतश्रेष्ठ श्वेतो रुक्मरथं प्रति।
 
 
अनुवाद
परन्तु श्वेत तो श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्रों का विशेषज्ञ था। उसने उन पर सात बाण चलाकर उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर दिया, इससे पहले कि वे उसके पास पहुँच पाते। हे भरतश्रेष्ठ! तब श्वेत ने एक बाण लिया जो सबके शरीर को भेदता हुआ रुक्मरथ की ओर चलाया। 57 1/2
 
But Shweta was an expert in the best weapons. He shot seven arrows at them and broke them into pieces before they could come near him. O best of the Bharatas! Then Shweta took an arrow which pierced everyone's body and shot it towards Rukmaratha. 57 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)