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mahabharat 6.47.51: वे सब श्वेता के सिर पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो ग्रीष्म ऋतु के अन्त में वायु द्वारा उड़ाये हुए बादल पर्वत पर जल बरसा रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.47.51 
ते तु बाणमयं वर्षं श्वेतमूर्धन्यपातयन्।
निदाघान्तेऽनिलोद्‍धूता मेघा इव नगे जलम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वे सब श्वेता के सिर पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो ग्रीष्म ऋतु के अन्त में वायु द्वारा उड़ाये हुए बादल पर्वत पर जल बरसा रहे हों।
 
All of them began to shower arrows on Shweta's head as if the clouds driven by the wind at the end of the summer season were pouring water on a mountain. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)