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mahabharat 6.47.44-45h: वह बलवान योद्धा अपने इन्द्रधनुष के समान विशाल बाणों को कानों तक फैलाकर मद्रराज शल्य को मार डालने की इच्छा से उन पर टूट पड़ा ॥44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  6.47.44-45h 
स विस्फार्य महच्चापं शक्रचापोपमं बली॥ ४४॥
अभ्यधावज्जिघांसन् वै शल्यं मद्राधिपं बली।
 
 
अनुवाद
वह बलवान योद्धा अपने इन्द्रधनुष के समान विशाल बाणों को कानों तक फैलाकर मद्रराज शल्य को मार डालने की इच्छा से उन पर टूट पड़ा ॥44 1/2॥
 
That strong warrior, stretching his huge arrows like a rainbow till his ears, attacked Madra king Shalya with the desire to kill him. 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)