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स हताश्वे रथे तिष्ठन् मद्राधिपतिरायसीम्।
उत्तरान्तकरीं शक्तिं चिक्षेप भुजगोपमाम्॥ ३८॥
अनुवाद
घोड़ों के मारे जाने पर भी उसी रथ पर बैठे हुए मद्रराज शल्य ने लोहे का बना हुआ एक भाला चलाया, जो सर्प के समान भयंकर था और राजकुमार उत्तर को मारने वाला था। 38.
Even after the horses were killed, Madra king Shalya, sitting on the same chariot, fired a spear made of iron, which was as dreadful as a serpent and was going to kill prince Uttara. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥