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mahabharat 6.47.34: तत्पश्चात् उस युद्धस्थल में भीमसेन ने तीन बाणों से शान्तनुपुत्र भीष्म को घायल कर दिया, एक बाण से कृपाचार्य को तथा आठ बाणों से कृतवर्मा को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.47.34 
ततो भीमस्त्रिभिर्विद्‍ध्वा भीष्मं शान्तनवं रणे।
कृपमेकेन विव्याध कृतवर्माणमष्टभि:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस युद्धस्थल में भीमसेन ने तीन बाणों से शान्तनुपुत्र भीष्म को घायल कर दिया, एक बाण से कृपाचार्य को तथा आठ बाणों से कृतवर्मा को घायल कर दिया।
 
Then, in that battle-field, Bhimasena wounded Shantanu's son Bhishma with three arrows, and pierced Krupacharya with one arrow and Kritavarma with eight arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)