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mahabharat 6.47.26: भरतश्रेष्ठ! अभिमन्यु के बाणों से कटकर गिरती हुई ध्वजा को देखकर भीमसेन ने सुभद्राकुमार के हर्ष को बढ़ाते हुए बड़े जोर से गर्जना की॥26॥   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.47.26 
तं तु सौभद्रविशिखै: पातितं भरतर्षभ।
दृष्ट्वा भीमो ननादोच्चै: सौभद्रमभिहर्षयन्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! अभिमन्यु के बाणों से कटकर गिरती हुई ध्वजा को देखकर भीमसेन ने सुभद्राकुमार के हर्ष को बढ़ाते हुए बड़े जोर से गर्जना की॥26॥
 
Bharatshrestha! Seeing the flag cut by Abhimanyu's arrows and falling, Bhimsen roared loudly, increasing the joy of Subhadrakumar. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)