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mahabharat 6.47.21: इस प्रकार अपने बाणों की वर्षा से उनके समस्त महान् अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट करके महाबली अर्जुनपुत्र अभिमन्यु ने अपने शय्याओं द्वारा भीष्म पर आक्रमण करके बड़े जोर से सिंहनाद किया। 21॥   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.47.21 
ततस्तेषां महास्त्राणि संवार्य शरवृष्टिभि:।
ननाद बलवान् कार्ष्णिर्भीष्माय विसृजन् शरान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने बाणों की वर्षा से उनके समस्त महान् अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट करके महाबली अर्जुनपुत्र अभिमन्यु ने अपने शय्याओं द्वारा भीष्म पर आक्रमण करके बड़े जोर से सिंहनाद किया। 21॥
 
Having thus destroyed all their great weapons with the shower of his arrows, the mighty son of Arjun, Abhimanyu, attacking Bhishma with his saikas, gave a loud lion's roar. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)