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mahabharat 6.47.16: अभिमन्यु का धनुष गाण्डीव धनुष के समान टंकार करने वाला, हाथों की चपलता दिखाने के लिए उपयुक्त स्थान वाला, तथा खींचने पर चक्र के समान गोल आकार में चमकने वाला, वहाँ सब दिशाओं में घूमने वाला था॥16॥   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.47.16 
तस्य लाघवमार्गस्थमलातसदृशप्रभम्।
दिश: पर्यपतच्चापं गाण्डीवमिव घोषवत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु का धनुष गाण्डीव धनुष के समान टंकार करने वाला, हाथों की चपलता दिखाने के लिए उपयुक्त स्थान वाला, तथा खींचने पर चक्र के समान गोल आकार में चमकने वाला, वहाँ सब दिशाओं में घूमने वाला था॥16॥
 
Abhimanyu's bow was like the Gandiva bow, which produced a twanging sound, was a suitable place to display the agility of the hands and when drawn, it was shining in a circular shape like a wheel. It was revolving there in all directions.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)