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mahabharat 6.47.14-15: अभिमन्यु के हाथों की चपलता देखकर देवता भी अत्यन्त प्रसन्न हुए। अर्जुनकुमार की लक्ष्य-साधना की सफलता से प्रभावित होकर भीष्म आदि सभी महारथियों ने उसे स्वयं अर्जुन के समान ही बलवान माना। 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 6.47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.47.14-15 
तस्य लाघवमुद्वीक्ष्य तुतुषुर्देवता अपि॥ १४॥
लब्धलक्षतया कार्ष्णे: सर्वे भीष्ममुखा रथा:।
सत्त्ववन्तममन्यन्त साक्षादिव धनंजयम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु के हाथों की चपलता देखकर देवता भी अत्यन्त प्रसन्न हुए। अर्जुनकुमार की लक्ष्य-साधना की सफलता से प्रभावित होकर भीष्म आदि सभी महारथियों ने उसे स्वयं अर्जुन के समान ही बलवान माना। 14-15॥
 
Seeing the agility of Abhimanyu's hands, even the gods were very happy. Impressed by the success of Arjun Kumar's goal-seeking, all the charioteers like Bhishma considered him as powerful as Arjun himself. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)