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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मके साथ अभिमन्युका भयंकर युद्ध, शल्यके द्वारा उत्तरकुमारका वध और श्वेतका पराक्रम  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.47.1-2 
संजय उवाच
गतपूर्वाह्णभूयिष्ठे तस्मिन्नहनि दारुणे।
वर्तमाने तथा रौद्रे महावीरवरक्षये॥ १॥
दुर्मुख: कृतवर्मा च कृप: शल्यो विविंशति:।
भीष्मं जुगुपुरासाद्य तव पुत्रेण चोदिता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! जब उस अत्यन्त भयंकर दिन का प्रथम भाग लगभग बीत गया, तब आपके पुत्र दुर्मुख की आज्ञा से कृतवर्मा, कृपाचार्य, शल्य और विविंशति वहाँ आये और बड़े-बड़े योद्धाओं का नाश करने वाले उस भयंकर युद्ध में भीष्म की रक्षा करने लगे॥1-2॥
 
Sanjay says- Rajan! When the first part of that most terrible day had almost passed, then at the command of your son, Durmukh, Kritavarma, Kripacharya, Shalya and Vivinsati came there and started protecting Bhishma in that terrible battle which destroyed the great warriors. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)