Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.46.44-45: महाराज! कुछ वीर पुरुष युद्धभूमि में भूमि पर गिर पड़े, क्योंकि उनका रथ टूट गया था और वे दूसरा रथ माँग रहे थे। इसी बीच बड़े-बड़े हाथियों के पैरों से वे कुचले गए। उस समय उनके रक्त से लथपथ शरीर पुष्पित पलाश वृक्ष के समान शोभायमान हो रहे थे। | mahabharat अध्याय 6.46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्ये च विरथा: शूरा रथमन्यस्य संयुगे॥ ४४॥
प्रार्थयाना निपतिता: संक्षुण्णा वरवारणै:।
अशोभन्त महाराज सपुष्पा इव किंशुका:॥ ४५॥
अनुवाद
महाराज! कुछ वीर पुरुष युद्धभूमि में भूमि पर गिर पड़े, क्योंकि उनका रथ टूट गया था और वे दूसरा रथ माँग रहे थे। इसी बीच बड़े-बड़े हाथियों के पैरों से वे कुचले गए। उस समय उनके रक्त से लथपथ शरीर पुष्पित पलाश वृक्ष के समान शोभायमान हो रहे थे।
Maharaj! Some brave men fell on the ground in the battle field because their chariot was broken and they were asking for another chariot. In the meantime they were crushed by the feet of big elephants. At that time their blood-soaked bodies were looking beautiful like the blooming Palaash tree. 44-45.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥