श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.46.41 
अपरे क्षत्रिया: शूरा: कृतवैरा: परस्परम्।
नैव शस्त्रं विमुञ्चन्ति नैव क्रन्दन्ति मारिष॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! अन्य वीर क्षत्रियों ने परस्पर वैर रखते हुए भी उस घायल अवस्था में भी अपने शस्त्र नहीं छोड़े और न रोये॥41॥
 
Honorable Maharaj! The other valiant Kshatriyas being at enmity with each other did not drop their weapons even in that wounded state nor did they cry. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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