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mahabharat 6.46.27: बहुत से हाथी युद्धभूमि में विचरण कर रहे थे, अपने दाँतों से घोड़ों और सवारों को गिरा रहे थे तथा अपने ध्वजों सहित रथों के समूहों को पैरों तले रौंद रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.46.27 
साश्वारोहान् विषाणाग्रैरुत्क्षिप्य तुरगान् गजा:।
रथौघानभिमृद्नन्त: सध्वजानभिचक्रमु:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
बहुत से हाथी युद्धभूमि में विचरण कर रहे थे, अपने दाँतों से घोड़ों और सवारों को गिरा रहे थे तथा अपने ध्वजों सहित रथों के समूहों को पैरों तले रौंद रहे थे।
 
Many elephants were roaming on the battlefield, throwing down horses and their riders with their tusks and trampling under their feet groups of chariots with their flags.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)