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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  6.46.18-19 
गदामुसलरुग्णानां भिन्नानां च वरासिभि:।
दन्तिदन्तावभिन्नानां मृदितानां च दन्तिभि:॥ १८॥
तत्र तत्र नरौघाणां क्रोशतामितरेतरम्।
शुश्रुवुर्दारुणा वाच: प्रेतानामिव भारत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस रणभूमि में गदाओं और मूसलों के प्रहार से कितने ही लोग घायल हो रहे थे, कितने ही लोग तीखी तलवारों से टुकड़े-टुकड़े हो रहे थे, कितने ही लोग हाथियों के दाँतों से छिन्न-भिन्न हो रहे थे और कितने ही लोग हाथियों के द्वारा कुचले जा रहे थे। इस प्रकार असंख्य जनसमूह अर्धमृत होकर एक-दूसरे को पुकार रहे थे। हे भारत! उनकी भयंकर पीड़ा भरी चीखें भूतों के कोलाहल के समान सुनाई दे रही थीं॥18-19॥
 
In that battlefield, many people were maimed by the blows of maces and pestles, many were being torn apart by sharp swords, many were torn apart by the elephants' tusks and many were crushed by the elephants. In this way, innumerable groups of people were calling out to each other, half dead. Bhaarat! Their terrible cries of pain were audible like the noise of ghosts.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)