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हे पुरुषश्रेष्ठ! जहाँ कहीं भी दृष्टि जाती थी, वहाँ रथ, हाथी, घुड़सवार और पैदल सेनाएँ बार-बार युद्ध करती हुई दिखाई देती थीं।
O best of men! Wherever one looked, one could see chariots, elephants, horsemen and infantry fighting again and again. 87.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि द्वन्द्वयुद्धे पञ्चचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें द्वन्द्व-युद्धविषयक पैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥