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mahabharat 6.45.75: कुंतिभोज के पुत्र ने भी अपनी तलवारों से विन्दक को घायल कर दिया। बदले में विन्दने ने भी कुंतिभोज के पुत्र को विकृत कर दिया। वह अद्भुत घटना घटी ॥75॥   |   mahabharat अध्याय 6.45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  6.45.75 
कुन्तिभोजसुतश्चापि विन्दं विव्याध सायकै:।
स च तं प्रतिविव्याध तदद्भुतमिवाभवत्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
कुंतिभोज के पुत्र ने भी अपनी तलवारों से विन्दक को घायल कर दिया। बदले में विन्दने ने भी कुंतिभोज के पुत्र को विकृत कर दिया। वह अद्भुत घटना घटी ॥75॥
 
Kuntibhoja's son also injured Vindaka with his swords. Vindane also mutilated Kuntibhoja's son in return. That amazing incident happened. 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)