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mahabharat 6.45.65: यहाँ तक कि युद्ध में अपने को ही घायल करने वाले प्रतिविन्ध्य को भी अत्यन्त बुद्धिमान शकुनि ने मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.45.65 
शकुनि: प्रतिविन्ध्यं तु प्रतिविध्यन्तमाहवे।
व्यदारयन्महाप्राज्ञ: शरै: संनतपर्वभि:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि युद्ध में अपने को ही घायल करने वाले प्रतिविन्ध्य को भी अत्यन्त बुद्धिमान शकुनि ने मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से घायल कर दिया।
 
Even Prativindhya, who used to pierce himself in the war, was wounded by the extremely intelligent Shakuni with arrows having bent knots. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)