Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.45.59: विकर्ण अपने बाणों से घायल करके भी सुतसोम को विचलित नहीं कर सके। इसी प्रकार सुतसोम भी विकर्ण को विचलित नहीं कर सके। उन दोनों का यह पराक्रम अद्भुत प्रतीत हो रहा था। 59. | mahabharat अध्याय 6.45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विकर्ण: सुतसोमं तु विद्ध्वा नाकम्पयच्छरै:।
सुतसोमो विकर्णं च तदद्भुतमिवाभवत्॥ ५९॥
अनुवाद
विकर्ण अपने बाणों से घायल करके भी सुतसोम को विचलित नहीं कर सके। इसी प्रकार सुतसोम भी विकर्ण को विचलित नहीं कर सके। उन दोनों का यह पराक्रम अद्भुत प्रतीत हो रहा था। 59.
Vikarna could not make Sutasoma tremble even after wounding him with his arrows. Similarly, Sutasoma could not disturb Vikarna either. This valour of both of them seemed amazing. 59.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥