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mahabharat 6.45.50: भरत! विराट् अत्यन्त क्रोधित हो गए और भगदत्त पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो मेघ पर्वत पर जल की बूँदें बरसा रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 6.45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.45.50 
विराटो भगदत्तं तु शरवर्षेण भारत।
अभ्यवर्षत् सुसंक्रुद्धो मेघो वृष्टॺा इवाचलम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
भरत! विराट् अत्यन्त क्रोधित हो गए और भगदत्त पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो मेघ पर्वत पर जल की बूँदें बरसा रहा हो।
 
Bhaarat! Virata became very angry and started showering his arrows on Bhagadatta as if a cloud was pouring water drops on a mountain. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)