Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.45.29-30: तब कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने टूटे हुए धनुष को फेंक दिया और दूसरा धनुष लेकर, जो अधिक वेगवान और शक्तिशाली था, मद्रराज शल्य को मुड़ी हुई गांठों वाले तीखे बाणों से आच्छादित कर दिया। फिर क्रोध में भरकर उन्होंने कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो'॥29-30॥ | mahabharat अध्याय 6.45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने टूटे हुए धनुष को फेंक दिया और दूसरा धनुष लेकर, जो अधिक वेगवान और शक्तिशाली था, मद्रराज शल्य को मुड़ी हुई गांठों वाले तीखे बाणों से आच्छादित कर दिया। फिर क्रोध में भरकर उन्होंने कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो'॥29-30॥
Then Yudhishthira, son of Kunti, threw away the broken bow and took another bow which was more swift and powerful and covered the Madra king Shalya with sharp arrows having bent knots. Then filled with anger he said, 'Stand, stand'॥ 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥