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mahabharat 6.45.25: महाबली सहदेव उस महायुद्ध में विजय पाने के लिए प्रयत्नशील थे। आपके पुत्र दुर्मुख ने उन पर आक्रमण कर बाणों की वर्षा से उन्हें घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.45: उभय पक्षके सैनिकोंका द्वन्द्व-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.45.25 
दुर्मुख: सहदेवं च प्रत्युद्याय महाबलम्।
विव्याध शरवर्षेण यतमानं महाहवे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाबली सहदेव उस महायुद्ध में विजय पाने के लिए प्रयत्नशील थे। आपके पुत्र दुर्मुख ने उन पर आक्रमण कर बाणों की वर्षा से उन्हें घायल कर दिया।
 
The mighty Sahadeva was making great efforts to win that great war. Your son Durmukha attacked him and wounded him with a shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)