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mahabharat 6.44.11: वह मेघ के समान गम्भीर स्वर में दहाड़ रहा था। उसकी वाणी इन्द्र के वज्र के समान भयंकर थी। उसकी गर्जना सुनकर आपके सभी सैनिक भयभीत हो गए।   |   mahabharat अध्याय 6.44: कौरव-पाण्डवोंके प्रथम दिनके युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 44: कौरव-पाण्डवोंके प्रथम दिनके युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.44.11 
तं श्रुत्वा निनदं तस्य सैन्यास्तव वितत्रसु:।
जीमूतस्येव नदत: शक्राशनिसमस्वनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह मेघ के समान गम्भीर स्वर में दहाड़ रहा था। उसकी वाणी इन्द्र के वज्र के समान भयंकर थी। उसकी गर्जना सुनकर आपके सभी सैनिक भयभीत हो गए।
 
He was roaring in a voice as deep as that of a cloud. His voice was as terrifying as the thunderbolt of Indra. Hearing that roar, all your soldiers were terrified.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)