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mahabharat 6.43.d4: दुर्योधन के पापों की निंदा करते हुए उन्होंने युद्ध करने का निर्णय लिया और पांडवों के साथ उनकी सेना में रहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.43.d4 
(अवसद् धार्तराष्ट्रस्य कुत्सयन् कर्म दुष्कृतम्।
सेनामध्ये हि तै: साकं युद्धाय कृतनिश्चय:॥ )
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के पापों की निंदा करते हुए उन्होंने युद्ध करने का निर्णय लिया और पांडवों के साथ उनकी सेना में रहने लगे।
 
Condemning the sins of Duryodhan, he decided to fight and started living with the Pandavas in their army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)