vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना
»
श्लोक d3h-100
श्लोक
6.43.d3h-100
संजय उवाच
ततो युयुत्सु: कौरव्यान् परित्यज्य सुतांस्तव।
(स सत्यमिति मन्वानो युधिष्ठिरवचस्तदा।)
जगाम पाण्डुपुत्राणां सेनां विश्राव्य दुन्दुभिम्॥ १००॥
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! तत्पश्चात युधिष्ठिर के वचनों को सत्य मानकर युयुत्सु आपके समस्त पुत्रों को त्यागकर पाण्डवों की सेना में सम्मिलित हो गया ॥100॥
Sanjay says- Rajan! Thereafter, considering Yudhishthira's words as true, Yuyutsu abandoned all your sons and went to join the Pandavas' army. 100॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd