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mahabharat 6.43.d3h-100: संजय कहते हैं- राजन! तत्पश्चात युधिष्ठिर के वचनों को सत्य मानकर युयुत्सु आपके समस्त पुत्रों को त्यागकर पाण्डवों की सेना में सम्मिलित हो गया ॥100॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक d3h-100
 
 
श्लोक  6.43.d3h-100 
संजय उवाच
ततो युयुत्सु: कौरव्यान् परित्यज्य सुतांस्तव।
(स सत्यमिति मन्वानो युधिष्ठिरवचस्तदा।)
जगाम पाण्डुपुत्राणां सेनां विश्राव्य दुन्दुभिम्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! तत्पश्चात युधिष्ठिर के वचनों को सत्य मानकर युयुत्सु आपके समस्त पुत्रों को त्यागकर पाण्डवों की सेना में सम्मिलित हो गया ॥100॥
 
Sanjay says- Rajan! Thereafter, considering Yudhishthira's words as true, Yuyutsu abandoned all your sons and went to join the Pandavas' army. 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)