श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक d1-25
 
 
श्लोक  6.43.d1-25 
एवं ब्रुवति कृष्णेऽत्र धार्तराष्ट्रचमूं प्रति।
(नेत्रैरनिमिषै: सर्वै: प्रेक्षन्ते स्म युधिष्ठिरम्॥ )
हाहाकारो महानासीन्नि:शब्दास्त्वपरेऽभवन्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान श्रीकृष्ण ये बातें कह रहे थे, तब सब लोग दुर्योधन की सेना की ओर आते हुए युधिष्ठिर की ओर देख रहे थे। कहीं महान् कोलाहल हो रहा था, तो कहीं लोग एक शब्द भी बोले बिना चुप रह गए॥ 25॥
 
When Lord Krishna was saying these things, everyone was staring at Yudhishthira coming towards Duryodhan's army. There was a great uproar somewhere and somewhere else people remained silent without uttering a single word.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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