श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  6.43.98 
वृणोमि त्वां महाबाहो युद्ध ॺस्व मम कारणात्।
त्वयि पिण्डश्च तन्तुश्च धृतराष्ट्रस्य दृश्यते॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! मैं तुम्हें स्वीकार करता हूँ। तुम मेरे लिए युद्ध करो। राजा धृतराष्ट्र का वंश और पिण्डोदक संस्कार तुम पर ही आश्रित प्रतीत होते हैं॥ 98॥
 
Mahabaho! I accept you. You fight for me. The lineage of King Dhritarashtra and the Pindodaka ceremony seem to be dependent on you.॥ 98॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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