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mahabharat 6.43.96: महाराज! हे निष्पाप राजा! यदि आप मुझे स्वीकार करें, तो मैं आप लोगों के लिए युद्ध में धृतराष्ट्र के पुत्रों के साथ युद्ध करूँगा॥ 96॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.43.96 
अहं योत्स्यामि भवत: संयुगे धृतराष्ट्रजान्।
युष्मदर्थं महाराज यदि मां वृणुषेऽनघ॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हे निष्पाप राजा! यदि आप मुझे स्वीकार करें, तो मैं आप लोगों के लिए युद्ध में धृतराष्ट्र के पुत्रों के साथ युद्ध करूँगा॥ 96॥
 
Maharaj! O sinless king! If you accept me, then I will fight with the sons of Dhritarashtra in the war for you people.'॥ 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)