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mahabharat 6.43.95: उस समय आपके पुत्र युयुत्सुने पाण्डवों को देखकर प्रसन्न हुए और धर्मराज कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से इस प्रकार बोले-॥95॥   |   mahabharat अध्याय 6.43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  6.43.95 
अथ तान् समभिप्रेक्ष्य युयुत्सुरिदमब्रवीत्।
प्रीतात्मा धर्मराजानं कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
उस समय आपके पुत्र युयुत्सुने पाण्डवों को देखकर प्रसन्न हुए और धर्मराज कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से इस प्रकार बोले-॥95॥
 
At that time, your son Yuyutsune, looking at the Pandavas, became happy and said to Dharmaraja Kunti's son Yudhishthira thus -॥ 95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)