श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  6.43.94 
अथ सैन्यस्य मध्ये तु प्राक्रोशत् पाण्डवाग्रज:।
योऽस्मान् वृणोति तमहं वरये साह्यकारणात्॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर सेना के मध्य में खड़े होकर बोले - 'जो भी वीर पुरुष हमारी सहायता के लिए हमारे पास आने को सहमत होगा, मैं उसे भी स्वीकार करूँगा ॥ 94॥
 
Thereafter the eldest Pandava Yudhishthira stood in the centre of the army and called out, 'Any brave man who agrees to come to our side for help, I will also accept him.' ॥ 94॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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