श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 43: गीताका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यसे अनुमति लेकर युद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.43.92 
कर्ण उवाच
न विप्रियं करिष्यामि धार्तराष्ट्रस्य केशव।
त्यक्तप्राणं हि मां विद्धि दुर्योधनहितैषिणम्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा- केशव! आपको यह जान लेना चाहिए कि मैं दुर्योधन का हितैषी हूँ। मैं उसके लिए अपने प्राण त्यागने को तैयार हूँ; अतः मैं उसके प्रति कभी कोई अप्रिय कार्य नहीं करूँगा॥ 92॥
 
Karna said- Keshav! You should know that I am a well-wisher of Duryodhan. I am ready to sacrifice my life for him; hence I will never do anything unpleasant to him.॥ 92॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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