कर्ण उवाच
न विप्रियं करिष्यामि धार्तराष्ट्रस्य केशव।
त्यक्तप्राणं हि मां विद्धि दुर्योधनहितैषिणम्॥ ९२॥
अनुवाद
कर्ण ने कहा- केशव! आपको यह जान लेना चाहिए कि मैं दुर्योधन का हितैषी हूँ। मैं उसके लिए अपने प्राण त्यागने को तैयार हूँ; अतः मैं उसके प्रति कभी कोई अप्रिय कार्य नहीं करूँगा॥ 92॥
Karna said- Keshav! You should know that I am a well-wisher of Duryodhan. I am ready to sacrifice my life for him; hence I will never do anything unpleasant to him.॥ 92॥